मकर लग्न 2020 : गोचरफल और प्रभाव, जाने क्या है खास नये साल में आपके लिए

#गुरु_ग्रह_धनु_राशि_में : वर्तमान समय में गुरु ग्रह का गोचर धनु राशि में है जो कि 30 मार्च तक और फिर 30 जून से 20 नवंबर तक रहेगा । मकर लग्न के लिए यह गोचर 12वे भाव में होगा । ज्योतिष अनुसार किसी भी ग्रह का अपनी राशि में गोचर करना शुभकारी परिणाम देता है । इस तरह मकर लग्न के लिए 12वे भाव में गुरु ग्रह 12वे भाव से संबंधित विषयों में ज्ञान देगा क्योंकि गुरु ग्रह ज्ञान का कारक है, इस लिए जो भी लोग डिजाइनिंग, modeling, अदाकारी में हैं या इस में कैरियर बनाना चाहते हैं उनको इस से संबंधित शिक्षा प्राप्ति और कैरियर बनाने के अवसर मिलेंगे । यह भाव विदेश से संबंधित है और मकर लग्न में गुरु ग्रह 3rd भाव का भी स्वामी ग्रह है इस तरह विदेश यात्रा के भी अवसर बनेंगे । छोटे भाई बहनों से दूरी के योग बनेंगे , गुरु ग्रह बुजुर्गों के स्नेह और आशीर्वाद का भी कारक है इस तरह बुजुर्गों की सलाह से आपकी 12वे भाव यानी past life से चल रही समस्या दूर होगी । बाहरी भाषा को सीखने में आपकी रुचि होगी । नई जगहों पर घूमने के अवसर बनेगे ।

#गुरु_ग्रह_पूर्वाषाढ़ा_नक्षत्र_में : 4 जनवरी से 8 मार्च के दरमियान गुरु ग्रह का गोचर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि शुक्र का नक्षत्र है । मकर लग्न के लिए यह गोचर 12वे भाव में शुक्र के नक्षत्र में होगा इस तरह 5, 10, 12वे भावो का यह योग आपको नई चीजें सीखने के योग बनेंगे, पंचम भाव acting drama, natural talent का है दसम भाव कर्म स्थान है और 12वा भाव टीवी इंटरनेट की दुनिया है , इस तरह अगर आपके पास कोई प्रतिभा या talent है तो आप खुद का youtube channel बना कर प्रसिद्धि प्राप्त कर सकते हो । दसम और 12वे भाव का यह संबंध आपको digital sources के माध्यम से सफलता देगा , आप खुद भी acting modeling सीख सकते हो । प्रेम संबंधों का सुख मिलेगा, नए मित्र आएंगे, नई जगहों पर घूमना होगा नई जानकारी नए एक्सपीरियंस होंगे । इस तरह समय का सदुपयोग करें ।

#गुरु_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र_में : 8 मार्च से 26 जुलाई के दरमियान गुरु ग्रह का गोचर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि सूर्य का नक्षत्र है । मकर लग्न के लिए यह गोचर 12वे भाव में सूर्य के नक्षत्र में होगा इस तरह 8th और 12th भाव का संबंध बनेगा , अष्टम भाव अंदरूनी रोग, बीमारी , दुर्घटना , अचानक होने वाले उतार चढ़ाव , धोखे का विचार किया जाता है और 12वा भाव वायरल होना है , किसी से धोखे की वजह से आपको नुकसान और हानि झेलनी पड़ सकती है । अगर कोई रोग या बीमारी है उस के चलते सर्जरी के योग बनेंगे । जिनको नोकरी से परेशानी चल रही है उनकी समस्या और बढ़ सकती है , इस लिए नई नोकरी की तलाश उनको कर लेनी चाहिए । अष्टम भाव गुप्त गतिविधियों का भी है इस लिए जो भी अधिकारी वर्ग के लोग हैं वह किसी भी तरह के गैरकानूनी कार्य ना करें नहीं तो मानहानि हो सकती है ।

#गुरु_ग्रह_वक्री : 14 मई से 13 सितंबर के दरमियान गुरु ग्रह वक्री रहेंगे । 14 मई से 30 जून के दरमियान गुरु ग्रह मकर लग्न के लिए लग्न भाव में वक्री होंगे । ज्योतिष अनुसार जब भी कोई ग्रह वक्री हो जाता है तो वह अपने कारक विषयो से संबंधित फल देने में असमर्थ हो जाता है । साथ ही मकर राशि में गुरु ग्रह नीच राशि का भी हो जाता है । 12वे भाव के स्वामी ग्रह का वक्री होने की वजह से आपके ideas सही कार्य नहीं करेगे , जबकि त्रितयेश के वक्री होने के कारण व्यर्थ की यात्राएं करनी पड़ सकती है , आस पड़ोस से झगड़े हो सकते हैं, छोटे भाई बहनों की और से भी परेशानी होगी । आपके actions सही नहीं जाएंगे , इस वजह से प्रतिष्ठा और सम्मान में कमी आएगी । उस के बाद 30 जून से 13 सितंबर के दरमियान वक्री गुरु ग्रह का गोचर 12वे भाव में होगा यह स्थिति व्यर्थ के खर्च बढ़ाएगी, इंटरनेट पर व्यर्थ की चीज़ें सर्च करने से आपके समय की बर्बादी होगी , शयन सुख की कमी होगी , मन में बुरे विचार रहने से मन अशांत रहेगा ।

#गुरु_ग्रह_मकर_राशि_में : 30 मार्च से 30 जून और फिर 20 नवंबर से गुरु ग्रह का गोचर मकर राशि में रहेगा । मकर लग्न के लिए यह गोचर लग्न भाव में होगा हालांकि ज्योतिष अनुसार लग्न भाव में गुरु ग्रह शुभ फल देता है लेकिन नीच राशि में होने के कारण अपने पूर्ण फल देने में असमर्थ होगा । इस तरह तृतीय भाव का स्वामी ग्रह नीच राशि में होने से आपके पराकर्म में कमी आएगी, छोटे भाई बहनों से परेशानी होगी, लग्न भाव में नीच राशि का गुरु सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी करेगा । 12वे भाव का स्वामी ग्रह लग्न भाव में आने से आत्म विश्वास की कमी होगी , मन कल्पनाओं में रहेगा ।

#शनि_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र_में : पूरे 2020 वर्ष के दौरान शनि ग्रह का गोचर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि सूर्य का नक्षत्र है । मकर लग्न के लिए यह गोचर लग्न भाव में सूर्य के नक्षत्र में रहेगा । इस तरह लग्न और अष्टम भाव का यह संबंध , अष्टम भाव रोग बीमारी दुर्घटना अचानक होने वाले हानि और लाभ से है जबकि लग्न भाव तन है इस तरह मकर लग्न वालों का मन इस वर्ष अचानक होने वाले परिवर्तनों से परेशान रहेगा , ज्योतिष ज्ञान की प्राप्ति या इस और झुकाव हो सकता है, गुप्तागों से संबंधित रोग परेशान कर सकते हैं । जिन पर सूर्य में शनि या फिर शनि में सूर्य दशा का प्रभाव होगा उनको पिता पुत्र के संबंध में परेशानी होगी, गुप्त और छुपे हुए शत्रु परेशान करेंगे । शनि कर्म कारक ग्रह है इस लिए साइंस और रीसर्च से जुड़े लोगों को लाभ और तरक्की के रास्ते बनेंगे ।

#शनि_ग्रह_वक्री : 11 मई से 29 सितंबर के दरमियान शनि ग्रह वक्री रहेंगे । मकर लग्न के लिए यह गोचर लग्न भाव में होगा । ज्योतिष अनुसार जब भी कोई ग्रह वक्री होता है तो वह अपने कारक विषयो से संबंधित शुभ फल देने में असमर्थ हो जाता है । इस तरह लग्न भाव में शनि का गोचर वक्री होने की वजह से कार्य में मन नहीं लगेगा , आलस्य रहेगा , सुबह देर से उठना और फिर सभी कार्यो में देरी होते रहना परेशानी देगा । धन भाव के स्वामी ग्रह का वक्री होना परिवार का सहयोग ना मिलना आय के साधन कमज़ोर होने से आय प्राप्ति में बाधा देगा । खर्च को लेकर किसी ना किसी तरह की परेशानी बनी रह सकती है । शनि ग्रह service का कारक है और लगन भाव तन है इस तरह वक्री शनि के प्रभाव से अधिकारी लोग वर्कप्लेस पर आपकी परफॉर्मेंस से नाखुश रह सकते हैं , जिस से नोकरी में परेशानी बनेगी ।

#शनि_ग्रह_मकर_राशि_में : 23 जनवरी 2020 से शनि ग्रह का गोचर अगले ढाई वर्ष के लिए मकर राशि में रहेगा । मकर लग्न के लिए यह गोचर लग्न भाव में रहेगा । ज्योतिष अनुसार अपनी राशि में गोचर करने वाले ग्रह अपने कारक विषयो के अनुसार सुख प्रदान करते हैं । इस तरह लग्नेश शनि का अपनी राशि में गोचर करना लग्न भाव यानी तन के सुख में वृद्धि करेगा , आपकी कार्यशैली बेहतर होगी , नोकरी / कारोबार में स्थाईत्व आएगा । द्वितीय भाव के स्वामी ग्रह का अपनी राशि में आना धन स्थिति में स्थायित्व देगा , घर परिवार से रिश्ते बेहतर होंगे । लेकिन जिनका नया विवाह हुआ है उनको रिश्ते को लेकर कुछ समस्याएं परेशान कर सकती हैं इस लिए गृहस्थ जीवन की शुभता के लिए एक दूसरे को पर्याप्त समय दें । अभी तक जिनकी नोकरी / कारोबार में बेहतर स्थिति नहीं है वह नई जानकारी और नई तकनीक के साथ कार्य करें , और सिर्फ अच्छी कार्यशैली को आधार बनाये जब आपका काम ही अच्छा हो जाएगा तो धन स्थिति अपने आप बेहतर होने लगेगी ।

#राहु_अद्रा_नक्षत्र_में : वर्तमान समय में राहु का गोचर अद्रा नक्षत्र में है जो कि 21 मई तक रहेगा । मकर लग्न में यह गोचर छठे भाव में राहु के ही नक्षत्र में होगा । ज्योतिष अनुसार छठे भाव में पापी ग्रह शुभता देते हैं इस तरह मकर लग्न के लिए छठे भाव में यह गोचर रोग शत्रु कर्ज़ से मुक्ति के रास्ते देगा, बाजार निवेश से लाभ नई नोकरी नया व्यवसाय तरक्की के नए अवसर मिलेंगे । छठा भाव खुद से ज़्यादा व्यस्त रहने की आदत है और राहु हर कार्य की अति का कारक है इस लिए आप जिस भी कार्य में होंगे आपको वहां ज़्यादा व्यस्तता बनी रहेगी जिस के चलते घर परिवार को समय नहीं दे पाएंगे जो कि 21 मई तक रहेगा । नक्षत्र स्वामी भी राहु है जो कि क्रोध भी देता है इस लिए वाणी से भी आपका क्रोध झलकेगा । अच्छी सेहत के लिए ज़्यादा पानी पिये और पेट का ख्याल रखें बाहर का खाना ना खाएं ।

#राहु_मृगशिरा_नक्षत्र_में : 21 मई से पूरे वर्ष राहु का गोचर मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा जो कि मंगल का नक्षत्र है । इसी दौरान मिथुन राशि में चल रहे राहु का गोचर 23 सितंबर को वृषभ राशि में होगा । मकर लग्न के लिए यह गोचर मंगल के नक्षत्र में रहेगा , इस तरह 4, 6, 11वे भाव का संबंध छठा भाव संघर्ष है विवाद है चतुर्थ भाव ज़मीन है 11वा भाव प्राप्ति है , इस तरह वाद विवाद में आपकी जीत होगी, नोकरी और कारोबार को लेकर स्थान परिवर्तन भी हो सकते हैं , नई चीजें सीखने और उनसे लाभ के योग होंगे । उस के बाद 23 सितंबर से राहु का गोचर मकर लग्न के लिए पंचम भाव में होगा और नक्षत्र मंगल का होगा इस तरह 4, 5, 11वे भाव का संबंध ज़मीन से income देगा, rent के माध्यम से आने वाली आय में वृद्धि होगी , घर परिवार का सुख बना रहेगा । नोकरी कारोबार में भी स्थिति सुखद बनेगी , आर्थिक लाभ बना रहेगा ।

#केतु_मूल_नक्षत्र_में : 17 जनवरी से केतु का गोचर मूल नक्षत्र में होगा जो कि 22 सितंबर तक रहेगा । मकर लग्न के लिए यह गोचर 12वे भाव में केतु के ही नक्षत्र में होगा । कुण्डली का यह भाव विदेश, व्यय, शयन सुख से संबंधित है जबकि केतु अलगाव का कारक ग्रह है , इस लिए आपका खर्च कम होगा धन बचाने की सोच बनेगी , लेकिन 12वे भाव में केतु की यह स्थिति मन को भी अशांत करेगी, संतान का भी स्वास्थ्य कमज़ोर रह सकता है । अचानक से यात्रा करनी पड़ सकती है , लेकिन अगर आप पर केतु में केतु ग्रह की दशा का प्रभाव होगा तो आपके खर्च कम दम से बढेंगे , उधारी और कर्ज़ बढ़े रहेंगे , धन बाद में आएगा और खर्च पहले से ही इंतज़ार कर रहे होंगे , जिसकी वजह से आर्थिक स्थिति कमजोर रहेगी । इस स्थिति से बचने के लिए गुरु ग्रह की शुभता के लिए उपाये ज़रूर करें , बड़ो का आशीर्वाद और सानिध्य प्राप्त करें ।

#केतु_जेष्ठा_नक्षत्र_में : 23 सितंबर से केतु का गोचर जेष्ठा नक्षत्र में होगा जो कि बुध का नक्षत्र है । मकर लग्न के लिए यह गोचर 11वे भाव में बुध के नक्षत्र में होगा इस तरह 6, 9, 11वे भाव का यह संबंध धन लाभ और प्रतिष्ठा की वृद्धि करेगा , छठा भाव निवेश है नवम भाव लम्बी अवधि है और 11वा भाव लाभ है , इस तरह लम्बी अवधि के लिए किए गए निवेश लाभ देंगे , चाहे शेयर बाजार हो चाहे gold खरीद कर उस को रखें , बड़ो की सलाह नोकरी कारोबार में लाभ देगी , काम काज के लिए दूर की यात्राएं भी होंगी उनसे भी लाभ होगा । मामा, मौसी के परिवार से भी रिश्ते सुखद होंगे उनके माध्यम से भी लाभ होगा । जो उच्च शिक्षा प्राप्ति में हैं उनको भी सफलता मिलेगी । खास कर जिन पर बुध में केतु या केतु में बुध ग्रह की दशा का प्रभाव है उनके लिए 23 सितंबर के बाद का समय लाभ देने वाला रहेगा , समय का सदुपयोग करें ।

यह आलेख दीप रामगढ़िया जी का है अधिक जानकारी के लिए उनसे संपर्क करें.

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