मकर संक्रांति पर किये जाने वाले स्नान और दान का महत्व



वर्ष की शुरुआत का पहला और बड़ा त्योहार है मकर सक्रांति । वैसे तो वर्ष में 12 सक्रांति होती हैं जिनको जानकारी नहीं है उनके लिए बता दें कि नवग्रहों में सूर्य ग्रह 12 राशियों में भृमण करता है हर राशि में गोचर करने की अवधि 30 दिन होती है और 30 दिन के बाद अगले 30 दिन के लिए सूर्य अगली राशि में गोचर के लिए प्रवेश करता है । जिस दिन सूर्य ग्रह का यह राशि परिवर्तन होता है उस दिन को सक्रांति कहा जाता है पंजाब में इसे संग्राद कहा जाता है । 12 राशियों के आधार पर वर्ष में 12 सक्रांति होती है मेष , वृषभ, मिथुन क्रम में , जिस में मकर सक्रांति का मतलब इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है । हालांकि मकर सक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाता था लेकिन अभी पिछले कुछ वर्ष से मकर सक्रांति का यह त्योहार 15 जनवरी मनाया जाने लगा है, इस लिए इस वर्ष भी मकर सक्रांति का यह त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा ।


#स्नान_और_दान_का_महत्व : मकर सक्रांति का शास्त्रीय महत्व है कि इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है, धनु राशि में सूर्य होने से शुभ कार्य जो रुक गए थे वह इस दिन से फिर से शुरू हो जाते हैं । इस दिन स्नान और दान का बहुत महत्व है । तीर्थ स्थलों पर जाकर, नदियों पर जाकर स्नान और दान किये जाते हैं । जिन के लिए बाहर जाकर स्नान करना संभव ना हो वह घर में ही गंगाजल जल में मिला कर स्नान कर सकते हैं । इस दिन दान किये जाने वाले पदार्थों में गुड़ से बनी सामग्री, तिल से बनी सामग्री होनी चाहिए , खीर बना कर भी खाने का विधान इस दिन है , क्योंकि खीर में सभी ग्रहो तत्व होते हैं इस लिए खीर खाने से नवग्रहों की कृपा प्राप्त होती है । जो लोग इस दिन गुड़ और तिल से बने भोजन पदार्थ खुद खाते हैं और दान भी करते हैं उनके पितर यमलोक के कष्टों से मुक्ति प्राप्त करते हैं और घर परिवार पर सुख शांति का आशीर्वाद देते हैं ।


#नवग्रहों_की_कृपा_प्राप्ति_का_दिन : जन्म कुण्डली में जो ग्रह पाप पीड़ित हो या दुष्प्रभाव दे रहा हो उस ग्रह से संबंधित शांति का उपाये इस दिन किया जा सकता है । खास कर जिन पर मंगल, शनि, राहु, केतु ग्रहो की दशा का प्रभाव हो या फिर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या हो उनको इस दिन उस के लिए उपाये करना चाहिए । रुद्राभिषेक, तिल अभिषेक, शिव उपासना, विष्णु कृपा के लिए विष्णु उपासना, लक्ष्मी कृपा के लिए लक्ष्मी उपासना , नवग्रहों से संबंधित अन्य उपाये जन्म कुण्डली दिखा कर किये जा सकते हैं । सक्रांति पर किये जाने वाले उपाये का प्रभाव अन्य दिनों से 100 गुना अधिक होता है । इस लिए जो भी वर्तमान समय में चल रही दशा से पीड़ित हो या चल रही शनि की साढ़ेसाती / ढैय्या कष्टमय हो उसका उपाये करवा सकते हैं ,


यह आलेख दीप रामगढ़िया जी का है . अधिक जानकारी के लिए उनसे संपर्क करें. call & whats app : पण्डित धर्म जी : 98556 - 99550



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