मेष लग्न 2020 : गोचरफल और प्रभाव, जाने क्या है खास नये साल में आपके लिए



#गुरु_ग्रह_धनु_राशि_में : वर्ष 2020 की शुरुआत से गुरु ग्रह का गोचर धनु राशि में है जो कि मेष लग्न में नवम भाव यानी भाग्य भाव है । मेष लग्न में गुरु ग्रह 9वे और 12वे भाव का स्वामी है इस तरह 9वे भाव में यह गोचर उन चीज़ों पर खर्च करवाएगा जो लंबे समय तक साथ देंगी , नए कारोबार नए निवेश नया घर नया वाहन उच्च शिक्षा विदेश यात्रा पर खर्च होंगे ।


#गुरु_ग्रह_पूर्वाषाढ़ा_नक्षत्र_में : 4 जनवरी से 8 मार्च तक गुरु ग्रह का गोचर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा , गुरु ग्रह मेष लग्न में 9वे और 12वे का स्वामी ग्रह है जबकि नक्षत्र स्वामी शुक्र 2सरे और 7वे भाव का स्वामी है । इस तरह इस समय अवधि में 9वे भाव में विराजमान गुरु ग्रह 2सरे और 7वे भाव से संबंधित फल देते हुए 4 जनवरी से 8 मार्च के मध्य धन से संबंधित विषयों में नुकसान देगा क्योंकि द्वितीय भाव मारक स्थान है , लेकिन जो मेष लग्न के जो लोग विदेश यात्रा के इच्छुक हैं या फिर ज्योतिष और अध्यात्म से जुड़े हुए हैं उनको इस अवधि में सुख और यश की प्राप्ति होगी ।


#गुरु_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र में : 8 मार्च से 26 जुलाई तक गुरु ग्रह का गोचर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा, जो कि सूर्य का नक्षत्र है , इस तरह 9वे भाव में गोचर करते हुए गुरु ग्रह का संबंध पंचम भाव से बनेगा । इस तरह त्रिकोण भावो का यह संबंध personality development करेगा , खास कर जो लोग बाजार निवेश से जुड़े हैं, शेयर बाजार में हैं , प्रेमी / प्रेमिका या जीवनसाथी की तलाश में हैं , नोकरी प्राप्ति या प्रोमोशन की तैयारी कर रहे हैं या फिर लम्बे समय से जो अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं या नया घर लेना चाहते हैं उनको 8 मार्च से 26 जुलाई तक लाभ और यश की प्राप्ति होगी ।


#गुरु_ग्रह_वक्री : 14 मई से 13 सितंबर के दरमियान गुरु ग्रह वक्री रहेंगे, हालांकि ज्योतिष अनुसार शुभ ग्रह वक्री होने पर शुभता में वृद्धि करते हैं लेकिन अनुभव में ऐसा देखने में नहीं आया , इस लिए गुरु ग्रह के इस वक्री समय अवधि के दौरान जल्दी या कुछ ही समय में मिलने वाली सफलता से प्रभावित ना हो , खास कर 14 मई से 26 जुलाई जब गुरु ग्रह सूर्य के नक्षत्र में वक्री रहेंगे तो व्यपारी वर्ग के लिए गलत फैसलों की वजह से नुकसान होगा, प्रेम संबंध खराब होंगे , संतान की तरफ से परेशानी आएगी , किसी भी रूप में धन से जुड़े कार्य इस समय में ना करें ।


#गुरु_ग्रह_मकर_राशि_में : 30 मार्च से 30 जून तक गुरु ग्रह मकर राशि में , और इस के बाद 20 नवंबर से वर्ष के अंत तक मकर राशि में ही गोचर करेगे । मेष लग्न में मकर राशि दसम भाव में है , इस लिए काम काज में व्यर्थ की भागदौड़ और व्यर्थ के निवेश व्यर्थ की यात्राएं इस समय अवधि में परेशान करेंगी । भाग्येश नीच राशि में होने से किये गए प्रयास सफल नहीं होंगे , अच्छा कार्य करने पर भी लोग प्रशंसा नहीं करेंगे । और व्ययेश नीच राशि में होने से अनावश्यक खर्च परेशान करेंगे ।


#शनि_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र_में : वर्ष 2020 की शुरुआत से शनि ग्रह धनु राशि में अस्त रहेंगे और 23 जनवरी 2020 से मकर राशि में गोचर करेंगे । नक्षत्र की बात करें तो पूरे वर्ष शनि ग्रह उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में गोचर करेंगे जो कि सूर्य का नक्षत्र है । मेष लग्न में शनि ग्रह 10वे और 11वे भाव का स्वामी है । लगभग 2 फरवरी तक शनि ग्रह अस्त रहने से प्रभावहीन रहेंगे । इस लिए 2 फरवरी से ही प्रभाव देंगे जो कि मकर राशि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेंगे । इस तरह पंचम और दसम भाव का यह संबंध केंद्रीय त्रिकोण राजयोग की तरह फल देते हुए नोकरी / व्यपार में तरक्की देगा, पिता और पिता समान लोगो की सलाह लाभ देगी , बुद्धि और विवेक से सही निर्णय लेकर कार्यक्षेत्र को नई दिशा मिलेगी ।


#शनि_ग्रह_वक्री : 11 मई से 29 सितंबर के दरमियान शनि ग्रह मेष लग्न के लिए दसम भाव में वक्री रहेंगे । जब भी शनि ग्रह वक्री होते हैं तो किये गए कार्यो में सफलता नहीं मिलती, की गई मेहनत व्यर्थ जाती है , इस लिए जो भी महत्वपूर्ण कार्य हो वह 11 मई से पहले करें । धन से संबंधित कार्य, ज़मीन से जुड़े कार्य लम्बी अवधि का निवेश शनि वक्री दौरान करने से बचें । दसम भाव में वक्री शनि पिता और सरकार से परेशानी देगा, घर में स्त्रियों का स्वास्थ्य खराब रह सकता है ।


#शनि_ग्रह_मकर_राशि_में : 23 जनवरी से शनि ग्रह अगले ढाई वर्ष के लिए मकर राशि में गोचर करेंगे । लाभ भाव का स्वामी दसम भाव में आने से पैतृक धन संपदा का लाभ होगा, दसम भाव में शनि का गोचर अपनी राशि में होने के कारण भाग्य उदय देगा, as profession किसी भी नई शुरुआत इस वर्ष में सफलता देगी , अगर पहले से भी कोई कार्य चल रहा है तो उस के लिए भी यह वर्ष शुभकारी रहेगा । पिता और पिता समान लोगो की सलाह लेकर कार्य करना शुभता देगा । कार्यस्थल पर ज़्यादा व्यस्तता की वजह से थकान रहेगी, चतुर्थ भाव पर शनि की दृष्टि मन के अनुसार वातावरण नहीं देगी , चाहे घर हो या नोकरी स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे , नए लोगो के बीच रहना पड़ेगा लेकिन उन के सहयोग से तरक्की भी होगी , जो भी परिवर्तन होंगे वह सकारात्मक रहेंगे । इस वर्ष की गई मेहनत से आगे का भविष्य सुखद बनेगा । पिता और घर के बुजुर्गों का तिरस्कार ना करें उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें । ज़मीन और वाहनों से जुड़े सुख प्राप्त होंगे । काम की वजह से घर से दूर की यात्रा करनी पड़ सकती है, प्रेम संबंधों के लिए या नए रिश्तो की शुरुआत के लिए यह समय शुभ नहीं रहेगा ।


#राहु_अद्रा_नक्षत्र_में : अभी वर्तमान समय में राहु का गोचर अद्रा नक्षत्र में है जो कि 21 मई तक रहेगा । राहु जो कि इच्छा शक्ति और भोग का कारक है राहु के ही नक्षत्र में इसका गोचर अनावश्यक यात्राएं देगा, अनावश्यक रूप से या अनावश्यक बहस से या अनावश्यक रिश्तो की वजह से समय और धन की हानि होगी, छोटे भाई बहनों से अनावश्यक ही विवाद और बहस की वजह से हानि होगी , जो भी किसी तरह के लेखन के कार्यो में हैं या फिर digital marketing में हैं उन के द्वारा लिखी या बताई जा रही चीज़ों से उन्हें कोई लाभ नहीं होगा । मानो कि दुकान पर एक चीज़ लेने गए फिर घर आकर पता चला कि कुछ और समान भी लाना था तो इस तरह एक ही एक्टिविटी में काफी समय व्यर्थ होगा , कही पर सरकारी कार्य के लिए जा रहे तो वहां जाकर पता चला कि कुछ ज़रूरी दस्तावेज तो घर पर रह गए तो इस तरह फिर से दूसरी बार आना पड़ा , इस तरह समय बार बार परेशानी देगा । इस लिए जो भी कार्य करें अच्छे से उसकी तैयारी रखें ।


#राहु_मृगशिरा_नक्षत्र_में : 22 मई से वर्ष के अंत तक राहु का गोचर मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा जो कि मंगल का नक्षत्र है । इस में भी 22 सितंबर तक राहु का गोचर मिथुन राशि यानी 3rd भाव में रहेगा । इस तरह 22 मई से 22 सितंबर तक मेष लग्न को 1, 3, 8वे भाव से संबंधित फल मिलेंगे । ज्योतिष अनुसार यह तीनों भाव आयु से संबंधित भाव है इस लिए 22 मई से 22 सितंबर के दरमियान आयु से संबंधित गम्भीर संकट परेशान करेंगे, खास कर मेष लग्न वाले जो जातक मंगल में राहु या राहु में मंगल की दशा से गुज़र रहे होंगे उन को यात्रा के माध्यम से दुर्घटना का भय रहेगा , खास कर जल स्थान से भी यात्रा ना करें , आग और कैमिकल का कार्य करते हुए भी सावधानी रखें । तृतीय और अष्टम भाव का यह संबंध छोटे भाई बहनों को स्वास्थ्य संबंधी बाधा देगा , अचानक धन लाभ भी संभव है । जबकि 23 सितंबर से वर्ष के अंत तक का समय राहु वृषभ राशि में रहते हुए मंगल के नक्षत्र के प्रभाव देंगे । यानी 1, 2 और 8वे भाव से संबंधित फल प्राप्त होंगे । द्वितीय भाव चेहरे से संबंधित है मंगल अग्नि और केमिकल है और अष्टम भाव भय है इस तरह 23 सितंबर से चेहरे और आंखों का ध्यान रखें । 23 सितंबर के बाद से धन के लिए दूर स्थानों की यात्रा के योग बनेंगे , चेहरे से संबंधित या आंखों से संबंधित अगर कोई ऑपरेशन करवाने का विचार हो तो इस समय में करवाया जा सकता है । कर्ज़ लेने के योग बनेंगे ।


#केतु_मूल_नक्षत्र_में : 17 जनवरी से 22 सितंबर तक केतु का गोचर मूल नक्षत्र में रहेगा । मेष लग्न के लिए 9वे भाव में यह गोचर 17 जनवरी से 22 सितंबर के दरमियान अध्यात्म पहलू यानी धर्म दान पुण्य धार्मिक यात्रा, सीखने की प्रविर्ती , बुजुर्गों का और कानूनी विषयो का सम्मान इन सब से एक तरफा चलते हुए समस्याओं में घिरेंगे । नोकरी / कारोबार में लाभ को लेकर उतावले रहेंगे , मेहनत की बजाए भाग्य के भरोसे बैठने की वजह से भाग्य निर्बल होगा, घर के बुजुर्गों की विपरीत आचरण करने की आदत इनके नुकसान का कारण बनेगी । कुल मिला कर यह समय ऐसा रहेगा कि लाभ की बजाए नोकरी / कारोबार की और बेहतरी के लिए नई तकनीक और नई चीजें सीखने पर ध्यान दें , इसी का आगे चल कर फायदा होगा ।


#केतु_जेष्ठा_नक्षत्र_में : 23 सितंबर से वर्ष के अंत तक केतु का गोचर अष्टम भाव में जेष्ठा नक्षत्र में रहेगा जो कि बुध ग्रह का नक्षत्र है । इस तरह मेष लग्न को 3, 6, 8वे भाव से संबंधित फल इस अवधि में प्राप्त होंगे । अष्टम भाव जो कि डर और रिस्क का है केतु का गोचर इस प्रविर्ती को और बढ़ाएगा जिसका प्रभाव 3rd और 6th भाव पर आएगा यानी पराकर्म की कमी, वाणी की वजह से नुकसान, वाहन से दुर्घटना , शारीरिक कष्ट के योग बनेंगे, बाजार निवेश , जुआ सट्टा से भी धन हानि होगी । खास कर जिन पर बुध में केतु या केतु में बुध की दशा का प्रभाव होगा उनको धन से संबंधित नुकसान होंगे । लेकिन जो लोग as प्रोफेशन शेयर बाजार से जुड़े हुए हैं उनको 23 सितंबर के बाद काफी मात्रा में धन लाभ होगा । स्किन और पेट से जुड़े रोग 23 सितंबर के बाद परेशान कर सकते हैं और वाहन भी ध्यान से चलाएं ।


यह आलेख दीप रामगढ़िया जी का है अधिक जानकारी के लिए उनसे सम्पर्क करें.

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