वृषभ लग्न 2020 : गोचरफल और प्रभाव, जाने क्या है खास नये साल में आपके लिए


#गुरु_ग्रह_धनु_राशि_में : वर्तमान समय में गुरु ग्रह का गोचर धनु राशि में है जो कि 30 मार्च तक रहेगा, इस के बाद 30 जून से 20 नवंबर तक धनु राशि में गुरु ग्रह का गोचर रहेगा । वृषभ लग्न में गुरु ग्रह 8th और 11th भावो का स्वामी है, अष्टम भाव में गोचर घर के बड़ो को कष्ट देगा, 12वे भाव पर दृष्टि से पुरानी समस्याओं से छुटकारा होगा, 4th भाव पर दृष्टि से ज़मीन से जुड़े कार्यो में सफलता मिलेगी , अगर नोकरी में है तो मन पसंद जगह पर कार्य करने को मिलेगा , धन के हालात बेहतर होंगे ।

#गुरु_ग्रह_पूर्वाषाढ़ा_नक्षत्र_में : 4 जनवरी से 8 मार्च के दरमियान गुरु ग्रह का गोचर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि शुक्र का नक्षत्र है । इस तरह 1, 6, 8वे भाव का यह संबंध ऐसी सभी समस्याओं को खत्म करेगा जो लंबे समय से परेशान कर रही हैं, ज़मीन से जुड़े कार्य बनेगे , तरक्की को लेकर आ रही बाधा दूर होगी, इस समय अवधि में किया गया कोई भी नया कार्य भविष्य में लाभ देगा , कोई भी नई शुरुआत इस समय अवधि में की जा सकती है ।

#गुरु_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र_में : 8 मार्च से 26 जुलाई के दरमियान गुरु ग्रह का गोचर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि सूर्य का नक्षत्र है । इस तरह 4 और 8वे भाव का यह संबंध अष्टम भाव से संबंधित सुख , गूढ़ ज्ञान की प्राप्ति , प्रेमी / प्रेमिका , जीवनसाथी से सुख , बड़ी इन्वेस्टमेंट से लाभ , बड़े स्तर के निवेश और लाभ के अवसर , दूर स्थानों की यात्रा से लाभ , गुप्त योजनाओं से कार्य करने से लाभ खास कर जिन पर गुरु में सूर्य या सूर्य में गुरु की दशा का प्रभाव होगा मनोकामना पूरी होगी ।

#गुरु_ग्रह_वक्री : 14 मई से 13 सितंबर के दरमियान गुरु ग्रह वक्री अवस्था में रहेंगे , खास कर 14 मई से 26 जुलाई तक मकर राशि यानी नवें भाव में गुरु ग्रह वक्री रहेंगे तो इस अवधि में गलत फैसलों से नुकसान, पिता और घर के बुजुर्गों से मतभेद , भाग्य संबंधित बाधा, कार्यो में असफलता से मानसिक परेशानी रहेगी । उस के बाद 26 जुलाई से 13 सितंबर के दरमियान गुरु ग्रह अष्टम भाव में वक्री होने से मित्रो की वजह से , प्रेमी / प्रेमिका की वजह से , सहकर्मियों की वजह से परेशानी आएगी , बेवजह का डर परेशान करेगा, परिवार का सुख और सहयोग ना मिलने से परेशानी होगी । इस लिए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य या तो 14 मई से पहले करें या फिर 13 सितंबर के बाद करें ।

#गुरु_ग्रह_मकर_राशि_में : 20 नवंबर से गुरु ग्रह का गोचर मकर राशि में रहेगा जो कि नवम भाव में है । भाग्य भाव में नीच राशि का गुरु निम्न कार्यो को करना पड़ सकता है, आप दूसरों की भलाई के लिए जो भी करेगे उसको लोग बुरा ही देखेंगे इस तरह दूसरों की मदद करने पर भी आपकी प्रतिष्ठा कम होगी । इस लिए गुरु ग्रह के इस गोचर के दौरान ना तो बिना मांगे किसी की मदद करें और ना ही किसी को कोई सलाह दें । लाभ भाव का स्वामी ग्रह नीच राशि में होने से लाभ और आय के साधन कमज़ोर होंगे , इस लिए जो भी नोकरी / व्यवसाय से संबंधित कोई बदलाव करने हो वह धनु राशि में गुरु के गोचर दौरान ही करें । और यदि जीवनसाथी की तलाश में हो तो जांच पड़ताल के बाद ही रिश्ता जोड़ें ।

#शनि_ग्रह_उत्तराषाढ़ा_नक्षत्र_में : वर्ष 2020 के दौरान शनि ग्रह का गोचर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में रहेगा जो कि सूर्य का नक्षत्र है । लगभग 2 फरवरी तक शनि ग्रह अस्त होंगे से प्रभावहीन रहेंगे इस लिए 2 फरवरी से शनि ग्रह गोचर प्रभाव देंगे । भाग्य भाव में शनि का गोचर सूर्य के नक्षत्र में रहेगा इस तरह 4th और 9th भावो का संबंध केंद्रीय त्रिकोण राजयोग की तरह फल देते हुए चतुर्थ भाव से संबंधित विषयों की वृद्धि करते हुए सुख प्रदान करेगा । इस दौरान आपको मन अनुकूल जगह पर कार्य करने के अवसर बनेगे, ज़मीन और वाहनों से जुड़े सुख प्राप्त होंगे , परिवारजनों के सुख में वृद्धि होगी ।

#शनि_ग्रह_वक्री : 11 मई से 29 सितंबर के दरमियान शनि ग्रह भाग्य भाव में वक्री होंगे । इस लिए नवम भाव खराब होने से शनि ग्रह जो कि सूर्य के नक्षत्र में होंगे तो चतुर्थ भाव से संबंधित सुखों की हानि करेंगे । इस समय अवधि में अगर आप नोकरी में है तो स्थानांतरण होने से परेशानी होगी , अगर घर से दूर रहते हैं तो घर परिवार से अशुभ समाचार की वजह से घर की और यात्रा करनी पड़ सकती है । अगर ज़मीन से जुड़ा कोई भी कार्य करना चाहते हैं तो शनि वक्री के दौरान वह कार्य ना करें । खास कर जिन पर सूर्य में शनि या शनि में सूर्य की दशा का प्रभाव होगा तो पिता और बुजुर्गों से परेशानी होगी ।

#शनि_ग्रह_मकर_राशि_में : वृषभ लग्न में शनि ग्रह 9th और 10th भावो के स्वामी ग्रह होकर योगकारक ग्रह हैं । ज्योतिष अनुसार योगकारक ग्रह का केंद्र या त्रिकोण में गोचर करना शुभ होता है । इस तरह 23 जनवरी से शनि ग्रह का गोचर वृषभ लग्न के लिए भाग्य भाव में होगा वह इनको as profession नए रास्ते देगा , घर परिवार से दूर की यात्रा करनी पड़ सकती है , चाहे वर्तमान समय में आप कही भी नोकरी कर रहे हो आपके लिए रोज़गार के नए अवसर बनेंगे । जो विद्यार्थी हैं और सरकारी नोकरी की तलाश में है उनकी यह मनोकामना पूरी होगी । खास कर जो भी वर्ष 2020 के दौरान शनि में सूर्य या सूर्य में शनि की दशा प्रभाव में है उनको बेहतर सफलता प्राप्ति के योग हैं । पैतृक संपत्ति को लेकर अगर कोई बात चल रही है तो प्राप्ति के योग बनेंगे ।

#राहु_अद्रा_नक्षत्र_में : वर्तमान समय में राहु का गोचर अद्रा नक्षत्र में है जो कि 21 मई तक रहेगा । वृषभ लग्न के लिए यह गोचर द्वितीय भाव में है, द्वितीय भाव आय का साधन है जबकि राहु चल और भरम का कारक है, इस लिए धन प्राप्ति और धन के खर्च को लेकर बुद्धि भृमित रहेगी , साथ ही क्योंकि यह भाव पारिवारिक सुख का है इस लिए परिवारजनों से सुख की कमी का अनुभव होगा । खास कर जिन पर राहु में राहु की दशा का प्रभाव रहेगा उन के लिए आर्थिक नुकसान की स्थिति बनेगी , इस लिए यदि किसी भी तरह का व्यवसायक निवेश या कही पर धन लगा रहे हैं तो 21 मई तक इंतजार करें । घर परिवार और अन्य वित्तिय मामलों में घर के बड़ो की सलाह लेकर ही कार्य करें ।

#राहु_मृगशिरा_नक्षत्र_में : 22 मई से राहु का गोचर पूरे वर्ष मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा । इस में भी खास कर 23 सितंबर तक राहु का गोचर द्वितीय भाव में रहेगा । मृगशिरा मंगल का नक्षत्र है जो कि वृषभ लग्न में 7th और 12th भावो का स्वामी है । इस तरह 22 मई से राहु का गोचर 2, 7, 12वे भाव से संबंधित फल देगा । ज्योतिष अनुसार 7th और 12th भाव दोनो ही गृहस्थ सुख से संबंधित हैं जबकि द्वितीय भाव मारक भाव भी है , इस तरह यह स्थिति गृहस्थ जीवन के सुख खराब करेगी , अगर घर परिवार में किसी बात को लेकर विवाद चल रहा है तो झगड़े बढेंगे और कोर्ट कचहरी तक बात जा सकती है , खास कर जिन पर मंगल में राहु या राहु में मंगल की दशा का प्रभाव रहेगा उनकी प्रेमी / प्रेमिका या जीवनसाथी से दूरी बनेगी । और 23 सितंबर से राहु का गोचर लग्न भाव में मंगल के नक्षत्र में होगा इस तरह 1, 7, 12वे भाव से संबंधित फल मिलेंगे , जिस से नए रिश्तो को शुरुआत होगी , लग्न भाव तन है और 12वा भाव मोक्ष का है और 7th भाव प्रेम संबंधों का है इस लिए जो लोग जीवनसाथी की तलाश में है उनके विवाह के योग बनेंगे , भोग विलासिता के अवसर बनेगे ।

#केतु_मूल_नक्षत्र_में : 17 जनवरी से केतु का गोचर मूल नक्षत्र में 23 सितंबर तक रहेगा । वृषभ लग्न में यह गोचर अष्टम भाव में रहेगा, इस लिए इस समय अवधि में ज्योतिष , साइंस व अन्य गुड़ विषयो की और झुकाव बनेगा , इन विषयों की ज्ञान प्राप्ति होगी , खास कर जिन पर केतु में केतु की दशा का प्रभाव होगा उनको साधना मन्त्र जाप, रिसर्च, ज्योतिष, जादू टोटके , वशीकरण में रुचि बनेगी इन से लाभ या हानि जन्म कुण्डली में गुरु ग्रह की स्थिति पर निर्भर करेगा । घर परिवार और खुद के nature में बदलाव होंगे , अच्छी चीज़े सीखने के अवसर बनेगे , केतु बड़ो का आशीर्वाद है इस लिए केतु की चतुर्थ भाव पर दृष्टि बड़ो की मदद से घर परिवार का सुख देगी , बड़ो की मदद से रोग और अनावश्यक खर्च दूर होंगे ।

#केतु_जेष्ठा_नक्षत्र_में : 23 सितंबर से वर्ष के अंत तक केतु का गोचर सप्तम भाव में जेष्ठा नक्षत्र में होगा । यह बुध का नक्षत्र है । इस तरह सप्तम भाव केतु का गोचरीय संबंध 2nd और 5th भाव से बनेगा । सप्तम भाव public support का है और द्वितीय भाव धन का और पंचम भाव आपकी कार्यशैली है इस तरह 23 सितंबर से लोग आपके कार्यो को पसंद करेंगे , जिस से आपको आर्थिक मज़बूती बनेगी । सप्तम भाव प्रेमी / प्रेमिका है अगर प्रेम विवाह में किसी तरह की बाधा आ रही है तो वह दूर होगी , गृहस्थ जीवन की भी शुभता बनेगी । किसी भी तरह के रुके हुए project , टेंडर , सरकारी कार्य इस समय में बड़ा आर्थिक लाभ देंगे , अधिकारी लोग आपकी मेहनत से खुश रहेंगे इस लिए नोकरी कर रहे जातक को प्रोमोशन के योग बनेंगे । खास कर जिन पर 23 सितंबर से बुध में केतु या केतु में बुध दशा का प्रभाव होगा उनको आर्थिक लाभ , सरकारी नोकरी की प्राप्ति , सम्मान की वृद्धि के योग बनेंगे । रोग ऋण शत्रु से अगर परेशानी है तो 23 सितंबर से वह दूर होंगे ।


यह आलेख दीप रामगढ़िया जी का है अधिक जानकरी के उनसे सम्पर्क करें.

©2019 by Times Astro. Proudly created with Wix.com